0:03 मेरे भाइयों और बहनों क्या यह अद्भुत बात है कि हम एक इकट्ठा आ सकते हैं। परमेश्वर को खोज सकते हैं। उसके वचन में देख सकते हैं। कि हम प्रोत्साहित हो सकते हैं। पहली बात जो मैं आपको दिखाना चाहता हूं बाइबल से 0:21 हमारा विषय है परमेश्वर चाहता है कि हम सारे निराशा से मुक्त हो जाए। आजाद हो जाए। परमेश्वर के कई शीर्षक है। वह हमारा पिता है। पर उसका एक शीर्षक यह भी है रोमियो 15 में और उसके पांचव वचन में 0:39 यहां परमेश्वर का एक शीर्षक है जो हमें कभी नहीं भूलना है। रोमियो 15 उसका पांचवा वचन। धीरज और शांति का दाता। और इंग्लिश में लिखा है परमेश्वर जो आपको धीरज और प्रोत्साहन देता है। शांति के जगह 0:59 प्रोत्साहन लिखा है। परमेश्वर है जो हमें प्रोत्साहन दे सकता है। और उसका शीर्षक ही यह है एक ऐसा परमेश्वर जो हमें प्रोत्साहन देता है। एक ऐसा परमेश्वर जो हमें धीरज 1:13 देता है कि हम अंत तक धरे रहे। और ऐसे दूसरे भी वचन हैं जो हमें बताते हैं परमेश्वर की इच्छा 1:32 कि हम सारे चिंता से हमें मुक्त होना है। काफी निराशा इसी वजह से आती है क्योंकि हम बहुत चिंतित होते हैं। इस पृथ्वी के किसी विषय के बारे में विशेषकर लोगों के विषय में जिनसे हम प्रेम 1:48 करते हैं। कोई बीमार हो जाता है या कोई कोई कठिन परिस्थिति से गुजर रहा है और हम चिंतित होते हैं। अब हमें यहां एक फर्क करना है कि एक सही चिंता रखना और बहुत अधिक उसके चिंतित होना। 2:08 यीशु मसीह ने कहा मत्त रचित सुसमाचार उसके छठे अध्याय में 10 वचनों के अंतर में मत्त 6 25 से लेकर 34 तक तीन बार यीशु मसीह ने कहा चिंता मत करो चिंता मत करो चिंता मत करो 2:26 मत्त 625 इसलिए मैं तुमसे कहता हूं कि अपने प्राण के लिए यह चिंता ना करना और फिर एक बार 31 वचन में चिंता ना करना। फिर एक बार 34 वचन में चिंता ना करना। 2:45 पर उसने यह भी कहा अगर आपको किसी विषय में चिंता करनी है तो फिर परमेश्वर के राज्य की चिंता कीजिए। 33 वचन पहले तुम परमेश्वर के राज्य की खोज करो और उसके धर्म की खोज करो। इसलिए कभी-कभी हमारे मन में यह चिंता इस 3:04 वजह से आती है। क्योंकि वह उसका राज्य नहीं है और उसका धर्म नहीं है जिसके पीछे हम खोजी है और वह कहता है अगर तुम परमेश्वर के राज्य को पहले खोज करो तो और उसके धर्म की पहले खोज करो तो 33 वचन सारी बातें जिन विषय में हम चिंता करते हैं वह तुम्हें मिल 3:23 जाएंगी। उसका यह मतलब मतलब नहीं है कि सब बातें सिद्ध होंगी क्योंकि यह एक असिद्ध पृथ्वी है। और आप कभी अपेक्षा नहीं कर सकते कि यहां सब कुछ सिद्ध होगा या आपके जीवन में बाहरी परिस्थितियों में मैं उसकी बात कर रहा हूं। वो कभी सिद्ध नहीं हो सकता। कुछ ना 3:38 कुछ गलत होगा। कोई ना कोई बीमार होगा। लोग लोगों की मृत्यु होगी। बीमारी होगी सब जगह। और विशेषकर इस समय जब यह कोविड-19 की महामारी चल रही है जिसने इस पूरे पृथ्वी को घेर लिया है। बहुत आसान है कि लोग डिप्रेस हो जाते हैं और हम जानते हैं कि 3:57 इस बीमारी से कई लोगों की मृत्यु हुई है और यह बिल्कुल स्वाभाविक है कि दुख होगा, विलाप होगा और बाइबल यह नहीं बताता कि शोक करना गलत है। पर पहला तीसरे में लिखा है कि हम बाकियों की तरह दुख नहीं करते। पहला तीसरे मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि ऐसे लोग 4:16 हैं जिनके प्रियजन की मृत्यु हो गई है। वह प्रभु के पास गए हैं। पहला तीसरा उसका चौथा अध्याय कहता है कि जो सो गए हैं। बाइबल कभी नहीं कहता कि मसीहों की मृत्यु हो गई है। वह हमेशा बाइबल में लिखा है वे 4:33 सोते हैं। बाइबल मसीह में सो रहे हैं। दूसरे शब्दों में वह प्रभु के साथ होने के लिए गए हैं। और परमेश्वर उनको फिर एक बार उठाएगा एक दिन। मृत्यु का यह अर्थ है कि हमेशा का अंत। और इसलिए बाइबल में शब्द लिखा है कि मसीह में 4:50 सोना। और इसलिए लिखा है दूसरों के समान शोक ना करो। 13वा वचन पहला तीसों चार 13 हम शोक जरूर करते हैं। यह स्वाभाविक है जब किसी की मृत्यु होती है। पर हम दूसरों की तरह शोक नहीं करते क्योंकि हमारे पास एक आशा है कि हम उनको वापस देखेंगे। और इसलिए 5:06 मैं उनको बताना चाहता हूं जो निराश हो गए हैं, दुखी हैं। मृत्यु की वजह से शायद उनके कोविड की वजह से या किसी और कारण से जिसकी हमने अपेक्षा ही नहीं की थी जो जब उनकी मृत्यु होनी चाहिए तो उसके काफी पहले किसी की मृत्यु हो गई। परमेश्वर सर्वसत्ता 5:21 रखने वाला परमेश्वर है और वही है जिसके हाथ में जीवन और मृत्यु है और वही निर्धारित करता है उसके सारे बच्चों के लिए परमेश्वर निर्धारित करता है कि कब वो उनको स्वर्ग में बुला लेगा। भजन 149 और उसका 16 और 17 वचन कहता है परमेश्वर ने 5:38 हमारे दिनों को निर्धारित किया है। दिनों की संख्या इस बात से हमें बहुत सांत्वना मिलना चाहिए। यह एक बहुत अद्भुत वचन है। हमें याद रखना है। और अगर आपने इसके पहले नहीं पढ़ा तो भजन 139 और उसका 16वा वचन। परमेश्वर ने मेरे जो 5:57 दिन थे उनको निर्धारित किया था और हमारे जन्म से पहले उसने निर्धारित किया था। यह वचन में कहता है और हम पाते हैं कि इसमें एक सांत्वना है। कोई यीशु मसीह का जीवन उससे छीन ना सकता था जब तक कि उसने उसके पूरे दौड़ को पूरा नहीं कर लिया था जब 6:12 उसको क्रूस पर मरना था। एक बार उसको एक नीचे फेंकने की कोशिश की गई पर उसको नहीं फेंक पाए। जब एक आंधी आई तूफान आई झील में वहां असंभवता उसको मरना क्योंकि परमेश्वर का वो समय नहीं था। और इसलिए मैं आप में से हर एक को यह कहना चाहता हूं। यह 6:26 परमेश्वर का वचन है। आपको बहुत बड़ा संत होने की जरूरत नहीं। ये सब परमेश्वर छोटे बच्चों से प्रेम करता है। नवजात शिशु विश्वास में जैसे वो उसके बड़े-बड़े सेवकों से प्रेम करता है। पर मैं यह आपको बताना चाहता हूं आपका सांत्वना करने के 6:41 लिए और प्रोत्साहन देने के लिए अगर आप परमेश्वर की इच्छा करने की कोशिश कर रहे हो और वही आपके जीवन की महत्वाकांक्षा है। तो आपकी मृत्यु हो ही नहीं सकती। परमेश्वर के समय के पहले कोई भी किसी भी तरह शैतान आपको नहीं मार सकता। 6:59 बीमारी आपकी मृत्यु नहीं ला सकती जब तक कि परमेश्वर का समय नहीं आ जाता। वो निर्धारित करता है कि हम कितने दिन जिएंगे। वो शायद बहुत लंबी आयु नहीं होगी। एक पूर्ण जीवन इसका अर्थ यह नहीं होता कि जिसको संसार कहता है एक लंबी आयु। 7:14 यीशु मसीह का जीवन बिल्कुल भरपूर जीवन था जो इस पृथ्वी पर कभी जिया गया। वह इस पृथ्वी को तब छोड़कर गया जब वह 33 वर्ष का था। फिर एक पूरा जीवन भरपूर जीवन क्या है? परमेश्वर की इच्छा को पूरा करना। और मैं यह कहना चाहता हूं 7:33 क्योंकि हम जानते हैं कि हमारे प्रियजन मसीह के साथ होने के लिए प्रिय मसीह के साथ रहने के लिए गए हैं। हमें सोचना है उनके विषय में कि हमने उनको एयरपोर्ट पर जाकर सिर्फ देखा है। बाय कहा है। वो एक एरोप्लेन में गए हैं। सोच कर देखिए। यह 7:47 आपके प्रियजन जिनकी मृत्यु हुई है वह एक फ्लाइट में जब बैठते हैं और वह एक बेहतर देश में जाते हैं। इस देश से काफी बेहतर क्या आप फिर निराश होते? हां, एक दुख होता कि शायद मैं इस व्यक्ति को काफी लंबे समय तक नहीं देखने वाला क्योंकि यह व्यक्ति 8:03 बहुत दूसरे देश के में गया है। पर एक आनंद भी है कि यह जो मेरा प्रियजन एक बेहतर देश में गया है और इसलिए जिसको संसार मृत्यु कहती है उसका यही देखे कि वो एयरपोर्ट पर किसी को बाय कहना है कि जो एक बेहतर देश पर गया है। अलविदा कहना है। इसलिए हम 8:18 दूसरों की तरह शोक नहीं करते। मैंने देखा है माता-पिताओं को जो उनके बेटे को या बेटियों को जब वो पढ़ाई करने कॉलेज में जाते हैं किसी और जगह एक बेहतर जगह कॉलेज में जाते हैं और उनको एयरपोर्ट पर जब वो अलविदा करने आते हैं तो उनके माता-पिता रोते हैं। वो क्यों 8:35 रो रहे हैं? इस वजह से नहीं कि वो वापस उनके बच्चों को नहीं देखेंगे। उसका वजह यह है कि वो कुछ समय दूर होने वाले हैं। उनके दिल में तो खुशी है। वो खुश हैं उनके बच्चों को कॉलेज में भेजने के लिए। एक बेहतर जगह भेजने के लिए और बिल्कुल इसी 8:49 तरह हमें देखना है जिसको संसार मृत्यु कहती है और हम शोक करते हैं पर हम दूसरों की तरह शोक नहीं करते और दूसरे भी कारण हो सकते हैं उदाहरण तौर पर हमें मेडिकल के लोग बताते हैं कि क्लीनिकल डिप्रेशन कुछ होता है। यह एक 9:06 मेडिकल बात है। मैं उसकी बात नहीं कर रहा। कुछ लोग का व्यक्तित्व ही ऐसा होता है और हम उनका न्याय नहीं करते। हम उनसे दया करते हैं। किसी और व्यक्ति का न्याय ना करें कि वह क्यों निराश है। बस अपने जीवन के विषय में चिंतित रहे। अपने आप के विषय 9:23 में हमारी यह बुलाट नहीं कि हम दूसरों का न्याय करें। पर एक मसीही के लिए मेरा विश्वास है परमेश्वर की यह इच्छा है कि हमें सारे चिंता से स्वतंत्र होना है और सारे निराशा से स्वतंत्र होना है जो इस वजह से आती है क्योंकि हम एक अपने आप से 9:41 बहुत बड़ी एक अपेक्षा रखते हैं। हम सिद्ध नहीं है पर हम सिद्धता की ओर बढ़ते जा रहे हैं। और उसी मार्ग पर परमेश्वर हमें सांत्वना देता है। हर समय ऐसे लोग हैं जो निराश हैं उनके गरीबी के वजह से विशेषकर इन दिनों में जब लोगों की 9:59 नौकरियां चली गई है हमें उनके प्रति बहुत दयावान होना है और अगर आप ऐसे किसी परिस्थिति से झूझ रहे हो मैं आपको प्रोत्साहित करना चाहता हूं परमेश्वर के राज्य को पहले खोजे और परमेश्वर अद्भुत बातें कर सकता है कि वो आपको मार्ग खोलेगा आपके परिवार के जरूरतों 10:17 के लिए प्रावधान करने के लिए परमेश्वर बहुत ज्यादा दिलचस्प है हमारे परिवार में हमारे पत्नी और बच्चों के खाना खिलाने में उनको शिक्षा देने में ताकि वो कल एक नौकरी पाए क्योंकि उसने हमें सिखाया कि हम प्रार्थना करें हे हमारे स्वर्गीय पिता आज 10:31 की रोटी तू हमें दे वही प्रार्थना यीशु ने हमें करने सिखाई उसने कहा कि तुम इसको हर दिन प्रार्थना कर सकते हो और इसका यह अर्थ है प्रभु मैं तुझ पर भरोसा करता हूं कि तू प्रावधान करेगा कि मैं अपनी रोज की रोटी कमा पाऊं। इसका मतलब मुझे एक नौकरी चाहिए। 10:47 मुझे एक घर चाहिए जहां मैं जी सकूं और मेरे बच्चों की पढ़ाई लिखाई करने की मेरी आवश्यकता है ताकि वह भी कल उनकी रोज की रोटी कमा सके और इस वजह से इसमें कुछ गलत नहीं है कि हम इन बातों को प्रभु से मांगे और यह विश्वास रखें कि परमेश्वर किसी ना 11:00 किसी तरीके से हमारे जीवन में सारी बातों को सही करेगा उस तरीके से नहीं जिस तरीके से हम अपेक्षा करते हैं पर जरूर वह हमारी चिंता करता है। ऐसे लोग हैं जो उदाहरण शायद आप में से कोई विधवा है और आपके पति की मृत्यु हो गई। परमेश्वर विधवाओं का 11:19 परमेश्वर है। यश्या 54 कहता है परमेश्वर खुद आपका पति होगा। अब जब आपका शारीरिक पति गुजर चुका है। परमेश्वर आपका पति होगा। वो आपकी चिंता करेगा। हम जवान बच्चों के विषय में सोचते हैं। छोटे बच्चे क्योंकि उनको उनके स्कूल में तकलीफ दी 11:33 जाती है बड़े लोगों से या दूसरे लोगों से। यह बहुत साधारण बात हो गई है। आज आम बात हो गई। शायद आपके बच्चे गुजर रहे हैं। हमें उनको प्रोत्साहित करना है। कोई बात नहीं अगर दूसरे लोग आपको तुच्छ जानते हैं आप पर हंसते हैं। याद रखिए यीशु आपसे 11:45 प्रेम करता है। उस बात से हमें अपने बच्चों को प्रोत्साहित करना है कि मांगे कि यीशु आपके साथ हो हमेशा जब आप स्कूल जाओ हमें अपने बच्चों को यह बताने की आवश्यकता है और कि वो बहुत जवान उम्र में यीशु मसीह में विश्वास में आ जाए और एक एक 12:00 और बात मैं कहना चाहता हूं। अलग-अलग प्रकार के हमारे व्यक्तित्व हो सकते हैं। कुछ लोग बहुत खुश होते हैं। सबसे बात कर सकते हैं। पर यह सिर्फ बाहरी होता है। कुछ लोग जो हमेशा हंसते हैं और बहुत खुशहाल 12:18 होते हैं। अगर आप उनके निजी जीवन को देखो तो वह बहुत दुखी और निराश होते हैं। मैंने सुना है कई सर्कस में जो क्लाउंस जो जोकर होते हैं वह आत्महत्या करते हैं। वह दूसरों को तो हंसाते हैं पर खुद जाकर वह आत्महत्या करता है। करते हैं और मैंने 12:32 दूसरों को सुना है जो एक्टर्स थे जो नाटक करते थे अभिनेता जो लोगों को हंसाने के मूवीज में काम करते थे और आत्महत्या करते हैं। उनका जो व्यक्तित्व है वह ऐसा है हमें यह बात याद रखनी है कि कुछ लोग बहुत बात कर सकते हैं और कुछ लोग अंदर ही अंदर 12:52 रहते हैं। परमेश्वर ने आपको जैसे बनाया उससे अलग होने की कोशिश ना करें। परमेश्वर ने हम सबको अलग बनाया है। और हमें कभी यह कोशिश नहीं करनी कि काश मैं दूसरे व्यक्ति जैसा बनता। परमेश्वर ने निर्णय लिया कि आप उनके जैसे ना बनो। आपको 13:09 आपके जैसा ही बनना है। यह एक पहली बात है जो मैं आपको कहूंगा। बिल्कुल इससे संतुष्ट रहे जिस व्यक्तित्व को परमेश्वर ने आपको दिया है। जब आपका जन्म हुआ। मेरा जन्म हुआ और मैं बहुत ही अंदर देखने वाला। मैं बहुत ज्यादा लज्जाता था। शर्म 13:27 आती थी। आप शायद इस पर विश्वास नहीं करोगे। जब आप मुझे बात करते हुए सुनते हो पर मैं बिल्कुल ऐसा ही था। मैं बिल्कुल भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो एक पार्टी में सबसे मुख्य स्थान ले सके या दूसरों को हाय कह सके आसानी से बात कर सके। मेरे लिए 13:41 बहुत कठिन था लोगों से जाकर बात करना और उनसे मित्रता करना। पर यह मेरा व्यक्तित्व था। पर जैसे मैं परमेश्वर को जाने लगा। मैंने पाया कि मेरी आनंद मैंने यीशु मसीह में पाया और उसने मेरे व्यक्तित्व को बदल दिया। और जब आप अपने आनंद को यीशु में पाते हो 14:01 और लोगों की रजामंदी नहीं चाहते आप अपने आप को बदलने की कोशिश ना करें क्योंकि आपको लोगों को प्रसन्न करना है। प्रभु मैं एक आनंदी मसीह होना चाहता हूं तेरी उपस्थिति में। मैं दूसरों को यह नहीं छवि दिलाना चाहता कि मैं आनंदी हूं। नहीं जब 14:15 कोई नहीं देख रहा तब मैं आनंदी होना चाहता हूं। मैं सिर्फ लोगों पर यह छवि नहीं करना चाहता कि मैं खुश हूं। मैं आपकी उपस्थिति में हमेशा खुश होना चाहता हूं। और इसलिए मैं इसको बताना चाहता हूं। अपने आप को अपने व्यक्तित्व के लिए अपने 14:30 को दोष मत देना। आप उसी के साथ जन्मे हो और पवित्र आत्मा इस वजह से आया है आपकी जो निर्बलता है व्यक्तित्व की उनको निकालने के लिए हमारे व्यक्तित्व के वो क्षेत्र जो मसीह जैसे नहीं है जो परमेश्वर को अपमानित करते हैं और उन क्षेत्रों में हमें बदलाव करने का 14:47 मदद करता है और मैंने देखा है अपने जीवन में इसको होते हुए थोड़े-थोड़ा करके पिछले 62 वर्ष में जब मैं मसीह था यह धीरे-धीरे हुआ पर यही तो मसीह जीवन है। मसीह जीवन एक यात्रा है जो सिद्धता की ओर हम सिद्ध नहीं है। मसीह जीवन एक पर्वत पर चढ़ने जैसा है। 15:04 सिद्धता का पहाड़ और यीशु मसीह भी इस पृथ्वी पर आया बिल्कुल हमारी तरह और वो हमारी तरह परखा गया पर उसने कभी पाप नहीं किया। यह हमारा व्यक्तित्व नहीं है कि हमें चिंता करनी है जिसके विषय में हमें पाप के विषय में चिंतित होना है 15:20 और बहुत सारी निराशा लोगों के जीवन में इस वजह से आती है क्योंकि हम दूसरों की तरह होने की कोशिश करते हैं। विशेषकर स्त्रियां अपने चेहरे को देखती है। मैं उतनी सुंदर नहीं दिखती जितनी मैं होना चाहता हूं या दूसरी स्त्री इतनी मैं सुंदर 15:32 नहीं हूं। जो ज्यादा सुप्रसिद्ध है और आप गलत चीज की खोज कर रहे हो। बाइबल बताती है। क्या आप जानते हो बाइबल क्या बताती है? सौंदर्य के विषय में, सुंदरता के विषय में और शारीरिक सुंदरता के विषय में हमें समझना है कि बाइबल क्या बताता है। फिर 15:46 आपको विश्राम रहेगा। पुरुष और स्त्रियों दोनों के लिए अच्छा है। नीति वचन 31 और उसका 30 वचन। यह दो बातें हैं जिसको इस संसार बहुत बढ़ावा देता है स्त्रियों में कि वह मनुष्यों को प्रलोभित करें और उनको आकर्षित करें। मूवी 16:03 के जो स्टार्स होते हैं नीति वचन 31 30 शोभा झूठी है। और सुंदरता वह व्यर्थ है। दो बातें जो यह संसार एक स्त्री में बढ़ावा देता है कि शोभावान बनो 16:20 और शारीरिक सुंदरता बाइबल यह बातें बताती है कि यह जो शोभा दिखती है किसी स्त्री में वो धोखा देने वाली है। झूठी है। वो आपको मूर्ख बनाने के लिए है। वो आपको मूर्ख बनाते और कई पुरुष इससे मूर्ख बन जाते हैं। वो बिल्कुल मूर्ख हो जाते हैं। 16:34 कि एक शोभामन एक सुंदर स्त्री जब वो उससे शादी करते हैं सिर्फ उसके सुंदरता के वजह से और दुर्भाग्यपूर्ण उसके साथ उसके साथ विवाह करते हैं। बाद में वो पाते हैं कि वो व्यक्ति बहुत बुरा हो सकता है। बहुत स्वार्थी हो सकती है और बिल्कुल मसीह जैसे 16:49 नहीं हो सकते। शोभा जो है वो झूठी है, फंसाने वाली है। वो चीज जो बहुत आकर्षक दिख रही है, एक बहुत शोभाम स्त्री में वो एक धोखा है। और शारीरिक सुंदरता बाइबल उसको व्यर्थ कहती है। नीति वचन 31 30 31 30 आप बहने बिल्कुल निराश ना होना। 17:09 अगर आप उतनी शोभा नहीं है, उतनी आकर्षक नहीं है दूसरों की तरह। क्योंकि बाइबल ये ये बातें निराशा रहती है और इन बातों से हमें निराश नहीं होना चाहिए और मैं चाहता हूं कि आप छुटकारा पाए इससे परमेश्वर एक ऐसा परमेश्वर है जो हमें प्रोत्साहन देता 17:24 है। सबसे आकर्षक अच्छे दिखने वाले स्त्रियां वो नए जन पाए हुए मसीह नहीं है। उनमें से कई लोग वो मूवी में है। मूवीज में है। मूवी स्टार्स है और वो मॉडल्स हैं। वो शैतान की सेवा कर रहे हैं। यह वो है जो बहुत आकर्षक है। परमेश्वर ने 17:42 शारीरिक सुंदरता इस वजह से नहीं दी। उसके सारे बच्चों को नहीं दी। मनुष्य पुरुषों को भी नहीं। और इसलिए हमें निराश नहीं होनी है। अपने दिखा हम कैसे दिखते हैं हमारे व्यक्तित्व की वजह से। कुछ लोग निराश होते हैं क्योंकि वो ज्यादा 17:57 ऊंचे नहीं है। लंबे नहीं है। वो लंबा होना चाहते हैं। काफी चीजें जो शारीरिक है। हमें यह देखना है कि परमेश्वर हम सबको अलग बनाता है। वह निर्धारित करता है। हम कितने लंबे होंगे, हम कितने अच्छे दिखेंगे। हमारा व्यक्तित्व क्या होगा? कई बार हम 18:13 निराश हो सकते हैं क्योंकि आपका परिवार दूसरों के इतना अच्छा नहीं परिवार नहीं है। शायद दूसरों के माता-पिता आपके लिए दूसरों के लिए अधिक प्रावधान करते हैं आपसे ज्यादा। परमेश्वर ने इन बातों को निर्धारित किया। एक बार हम विश्वास करते 18:25 हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने यह निर्णय किया कि मैं किस परिवार में जन्म लूं और किस प्रकार के मेरे पास प्रावधान हो संसाधन हो मेरे परिवार के पास। परमेश्वर की इच्छा में मैं एक सांत्वना प्राप्त करता हूं। उसकी इच्छा कुछ भी 18:38 क्यों ना हो और जैसे आप इसमें बढ़ बढ़ोतरी करते हो आप पाओगे कि परमेश्वर दूसरे लोग आपसे कैसे बर्ताव करता है उस पर भी नियंत्रण करता है मैंने देखा है अपने जीवन में रोमियो 8:28 कहता है परमेश्वर सारी बातों से अच्छाई उत्पन्न करता है उनके प्रति जो 18:56 उससे प्रेम करते हैं। क्या आप निराश हो सकते हो अगर आपके जीवन में सब कुछ अच्छा काम कर रहा है तो यह एक अद्भुत वचन है। सबसे जाना माना वचन है मसीहों में रोमियो 8:28 परमेश्वर सब बातें मिलकर भलाई को उत्पन्न करता है उसके लिए जो उससे प्रेम 19:12 करते हैं सबके लिए नहीं जो परमेश्वर से प्रेम रखते हैं और क्या आप जानते हो वह कौन सी बात है परमेश्वर के प्रेम के जो सबसे बड़ा शत्रु है वह बहुत जरूरी है समझना परमेश्वर के सबसे बड़ी बात जो हमें बाधा डालती है परमेश्वर से प्रेम रखने से 19:30 वह है पाप हां पाप तो है पर यीशु मसीह ने कहा लुका 16 में और उसका 13वा वचन लुका 16 13 पैसा यह परमेश्वर के विरुद्ध खड़ा है और अगर आप 19:50 पैसे से प्रेम करो तो परमेश्वर से आप बैर करोगे। क्या आप यह जानते हो इस वचन को? लक 16 13 पढ़कर देखिए। सब लोग जो पैसे से प्रेम करते हैं, वह परमेश्वर से बैर रखते हैं, घृणा करते हैं। यह सच्चाई है। आप उसको पसंद करें या ना करें, आप कहोगे कि आप परमेश्वर से घृणा 20:07 नहीं करते। मैं आशा करता हूं कि आप नहीं करते। पर अगर आप पैसे से प्रेम रखते हो तो बाइबल बताता है कि आप परमेश्वर से बैर करते हो। आप जाने या नहीं। शायद आप बड़े घृणा करने वाले नहीं हो। पर परमेश्वर की थोड़ी घृणा आपके मन में है। और उस वजह से 20:21 शायद आप निराश हो। क्योंकि फिर आपके पास जीवन में दूसरी महत्वाकांक्षा है। परमेश्वर की इच्छा पूरी करने के बजाय मैं आपको यह ईमानदारी से बताना चाहता हूं। मेरे भाइयों, मेरे बहनों अगर आपके जीवन में कोई और महत्वाकांक्षा है आपके इस पृथ्वी के जीवन पर इस 20:36 महत्वाकांक्षा को छोड़कर कि उस योजना को पूरा करना जो परमेश्वर ने आपके जीवन के लिए बनाई। आपके जन्म के पहले आपकी कोई और ही योजना अगर होगी तो आप जरूर निराश होंगे। एक दिन या दूसरे दिन या शायद अपने जीवन भर आप निराश रहोगे। पर अगर आप यह बात निर्णय डिसाइड करो कि 20:54 मेरे जन्म के पहले प्रभु भजन 149 उसके 16व वचन के हिसाब से तेरे पास मेरे जीवन के लिए एक योजना थी तूने योजना की कि मेरे किससे शादी करूं मैं कहां जिऊंगा मैं कितना पैसा कमाऊंगा मेरे माता-पिता कौन होंगे और बहुत सारी बातें मेरे जीवन पर 21:10 जिस पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है और जो परिस्थितियां है मेरे जीवन के जो लोग मुझे प्रोत्साहित करेंगे जो लोग मुझे निराश करने की कोशिश करेंगे आपने ये सारी बातें निर्धारित की है ठहराई ही है और मैं पैसे से प्रेम नहीं करूंगा। मैं 21:26 संसार से प्रेम नहीं करूंगा। मुझे पैसा कमाना है जीने के लिए। मैं कोशिश करूंगा जितना हो सके मैं कमाऊं। मैं आपको यह बताना चाहता हूं। इसमें कुछ गलत नहीं है। जितना संभव है उतना पैसा कमाना। अगर आप बेहतर नौकरी पाते हो। जहां ज्यादा बड़ी 21:40 तनख्वाह है सब कुछ ठीक है तो वहां जाइए। उसमें कुछ इसमें कोई अच्छा ही नहीं है कि आप छोटी तनख्वाह का जॉब ले लें और मैं कम तनख्वाह कमाता हूं। इससे आप परमेश्वर के नजदीक नहीं आते हो। आपकी तनख्वाह आपको परमेश्वर से दूर या नजदीक नहीं ले जाती। 21:53 नहीं परमेश्वर का आपके जीवन के लिए एक योजना है और अगर आपने यह निर्णय किया है यही मैं आपको बताना चाहता हूं। यही मैं करना चाहता हूं तो मेरा विश्वास है कि आप सबसे खुशहाल और आनंदी व्यक्ति रहोगे। क्या आप जानते हो सबसे आनंदी व्यक्ति यीशु मसीह था इस 22:07 पृथ्वी पर सारी समस्याएं जो लोगों ने उसको दी उसके बावजूद पर क्या आप जानते हो उसका रहस्य क्या था यीशु मसीह के जीवन का बहुत जरूरी है समझना। यीशु मसीह के जीवन का रहस्य था जो उसने खुद बताया। इस वजह से वह बहुत खुशहाल व्यक्ति था। 22:23 मेरा यह विश्वास है कि यीशु मसीह कभी निराश नहीं था। एक सेकंड भी नहीं उसके पूरे जीवन काल में वो बहुत दबाव के नीचे होता था और सब बातें और उसने पाप के खिलाफ लड़ाई लड़ी। हमारी तरह वो प्रलोभित हुआ परखा गया पर उसने पाप नहीं किया। पर वो 22:39 कभी-कभी निराश नहीं हुआ। और बाइबल बताती है कि हमें वैसा चलना है जैसा यीशु चलता है। और इसलिए मेरा विश्वास है कि परमेश्वर चाहता है कि मैं कभी निराश नहीं हूं। यही आप आपके हृदय में विश्वास रखते हो। सबसे पहले परमेश्वर ने मुझे बुलाया है कि मैं 22:54 वैसे चलो जैसे यीशु चलता था। यह बिल्कुल स्पष्ट वचन है। मैं आपको यह दिखाना चाहता हूं। अगर आप नहीं जानते थे तो पहला यूहना उसका दूसरा अध्याय और उसका छठा वचन अगर कोई कहता है कि आप मसीह मैं मसीह में हूं और मसीह मुझ में है तो आपको चाहिए कि इसका 23:11 मतलब यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। मतलब जैसे यीशु चलता था यीशु मसीह जैसे बनना नहीं उसको उसके जैसा बनना वो लिखा है पहला योना तीसरे अध्याय उसके दूसरे वचन में हम उसके जैसे बन 23:28 जाएंगे जब वो वापस आएगा हम पूरी तरीके से मसीह के जैसे नहीं बन सकते जब तक कि वह वापस नहीं आता यह हमारा पूरा व्यक्तित्व रहेगा हमारा जो हम नहीं जानने वाला भाग है और जिसको हम जानते हैं सचेत और अचेत भाग जो सिर्फ 10% होता है सचेत हम पूरी तरीके से मसीह के जैसे तभी 23:47 बनेंगे जब वो वापस आएगा। पर तब तक हमारे सचेत क्षेत्र में हमारे जीवन के वो सिर्फ 10% है। हमें वैसे चलना है जैसे यीशु चलता था। और यह एक संतुलन है। मैं कभी भी यीशु जैसा नहीं बनूंगा जब तक वो वापस नहीं आता और इसलिए मैं पहचानता हूं 24:03 कि मेरे जीवन के अंदरूनी अचेत जीवन के ऐसे कुछ क्षेत्र होंगे जहां मैं यीशु जैसा नहीं हूं। जो मैं धीरे-धीरे मुझे वो जानकारी मिलती है। पर मेरे सचेत क्षेत्र में जीवन के जब बाइबल मुझे कहती है कि मुझे चलना है जैसे यीशु चलता था। वो जरूर 24:19 मुझे सामर्थ देगा कि मैं उसकी तरह चल पाऊं। क्या आप कल्पना कर सकते हो एक पिता अपने बेटे को भेजता है कुछ खरीदने के लिए और उसको पैसा ही नहीं देता वो खरीदने के लिए। मुझे याद है एक बार मेरा बेटा बहुत छोटा था। मैंने उसको मार्केट में भेजा कि 24:35 वो ब्रेड लेके आए। वो नजदीकी दुकान था। वो भाग गया। तुरंत भाग गया। कितना ही आज्ञाकारी मेरा बेटा था। वो शायद नौ या 10 ही साल का था। और बहुत जल्दी वो वापस आ गया। वो भागते वापस आया। मैंने कहा क्या हुआ? उसने कहा पापा पैसे दो। वो पैसा लेने 24:53 के बिना ही भाग गया था ब्रेड लेने के लिए। मैं उससे क्या अपेक्षा कर रहा था? क्या मैं अपेक्षा कर रहा था वो कहीं जाकर कमाए। वह पैसा कमाकर ब्रेड लाए। नहीं। जब मैंने उसको कहा जाकर ब्रेड खरीदने के लिए। मैं अपेक्षा करता था कि वह कहे कि पापा मुझे 25:07 पैसे दो। जरूर और यह अपने जीवन को लागू करें और जब परमेश्वर आपको कुछ भी चीज करने को कहता है वो बिल्कुल यह अपेक्षा नहीं करता कि आप खुद उन संसाधनों को उत्पन्न करो यह करने के लिए वो कहता है मुझसे मांगो सामर्थ 25:25 मांगो मैं वो करने के लिए मेरे मुझ पर आकर वचन मांगो क्या कहना है यही मैंने किया है पिछले 60 वर्ष से जब मैं प्रचार कर रहा हूं मैं कहता हूं प्रभु मैं नहीं जानता इन लोगों को क्या कहूं मैं लोगों की जरूरत भी नहीं जानता। मैं कैसे उस जरूरत को पूरा कर सकता अगर 25:41 मैं जरूरत नहीं जानता। एक डॉक्टर भी आपसे पूछता है कि आपकी समस्या क्या है? फिर आपकी सहायता करने की कोशिश करता है। पर प्रचारक तो इससे भी ज्यादा कठिन है। वो कई लोगों से बात कर रहे हैं जिनके प्रॉब्लम्स उन्होंने उसे उसे नहीं मालूम। मैं नहीं 25:53 जानता आपकी क्या समस्या है। आप सबों की जो आज बैठे हो परमेश्वर जानता है और मैं कहता हूं प्रभु आप मुझे एक सही वचन दो ताकि ये सारे लोग जो सुन रहे हैं उनके सहायता से कर सके। यह कौन कर सकता है? सिर्फ परमेश्वर और मैंने देखा इन सारे वर्षों 26:07 में अपने जीवन के जब मैं अपना प्रचार किया है परमेश्वर मुझे वो वचन देता है और मैं यह जानता हूं क्योंकि लोग मेरे पास आकर कहते हैं भाई जैक ये बिल्कुल वही वचन था जो मेरी जरूरत थी जो आर्टिकल्स हम भेजते हैं उसमें भी जो लेख भेजते हैं कई हमें 26:21 जवाब आते हैं यह हमारी बुद्धिमानी की वजह से नहीं है बिल्कुल नहीं मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है इसमें परमेश्वर मुझे कुछ देता है और मैं दूसरों को देता हूं और मैं उसका श्रेय नहीं ले सकता पर मैं क्या कहता हूं परमेश्वर लोगों की जरूरत जानता 26:34 है और वो वो आपकी जरूरत जानता है और अगर आप उससे मांगो तो वो आपको देगा। कई बातें मेरा विश्वास है हम नहीं पाते क्योंकि हम मांगते ही नहीं। आपके पास नहीं है क्योंकि आप मांगते नहीं। क्या आप इस वचन को जानते हो याकूब की पत्री में? याकूब उसके चौथे 26:50 अध्याय में यह कारण क्यों? आपके पास कुछ बात नहीं है। क्योंकि आप मांगते नहीं। दूसरे वचन का आखिरी भाग याकूब चार दो उसका आखिरी भाग कुछ प्राप्त नहीं करते। मतलब तुम्हारे पास कुछ नहीं है जो परमेश्वर चाहता है कि तुम्हारे पास हो और तुम उसके 27:06 लिए मांगते ही नहीं। आप असहायित होकर यीशु परमेश्वर के पास आकर नहीं कहते कि प्रभु यह मेरी आवश्यकता है। तू उस प्रोत्साहन का परमेश्वर है। मैं अपने आप को प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहा हूं। मैं नहीं कर सकता। मैं चाहता हूं प्रभु तू मुझे प्रोत्साहित कर। हर दिन 27:24 क्योंकि मैं एक ऐसा व्यक्ति है जो हमेशा निराश हो जाता हूं। और तू कहता है कि तू प्रभु का प्रोत्साहन का परमेश्वर है। मैंने वह रोमियो 16 में पढ़ा है। अब प्रभु मैं नहीं चाहता कि यह वचन मेरे विषय में कहा जाए कि मेरे पास यह नहीं है क्योंकि 27:38 मैंने मांगा नहीं। मैं मांग रहा हूं प्रभु। मैं विश्वास से मांगने वाला हूं प्रभु। और उसके याकूब के पत्री में पहला लिखा है जब किसी विषय से मांगो। अगर आप विश्वास से मांगोगे तो आप प्राप्त करोगे। याकूब एक छ पर अगर आप संदेह कर कर मांगोगे अरे मैं 27:55 नहीं जानता मुझे प्रभु देगा या नहीं फिर वह कहता है वह व्यक्ति परमेश्वर से कुछ भी नहीं मिलेगा क्या आप जानते हो बाइबल में एक ऐसा वचन है जो कहता है कि आप प्रभु से आपको कुछ नहीं मिलेगा ऐसा एक वचन है याकूब एक छ अपेक्षा ही मत करो कि आपको प्रभु से कुछ 28:15 मिलेगा किसको वचन कहता है कि कोई अपेक्षा मत करो कि आपको प्रभु से कुछ मिलेगा हिंदी में सातवां वचन जो किसी विश्वास के बिना कुछ मांगता है। यह ऐसा है कि आप आपके संसार के पिता के पास जाते हो। पृथ्वी के पिता पापा मैं आपसे कुछ मांगने वाला हूं। पर मैं जानता 28:32 हूं कि आप मुझसे प्रेम नहीं करते। मैं जानता हूं कि आप मेरी देखभाल नहीं करोगे। मैं जानता हूं कि आप मुझे नहीं देने वाले। कल्पना करके देखिए कि आप परमेश्वर के पास ऐसे जाते हो। परमेश्वर मैं चाहता हूं यह मेरी बहुत जरूरत है। मैं प्रोत्साहन चाहता 28:45 हूं। मैं चाहता हूं कि हर दिन तू मुझे प्रोत्साहित करे। पर मैं जानता हूं कि तू मुझे नहीं देगा। क्योंकि तू बहुत एक कठोर हृदय वाला परमेश्वर है। मैं आपको बताना चाहता हूं आपको वह नहीं मिलेगा। आप हमेशा निराश रहोगे जीवन भर क्योंकि परमेश्वर की 28:59 आपकी सोच ही गलत है। यीशु मसीह इस पृथ्वी पर आया सिर्फ हमारे पापों की क्षमा करने के लिए नहीं। इसको याद रखिए मेरे भाइयों बहनों। कई लोग सोचते हैं कि यीशु मसीह इस पृथ्वी पर आया। हमारे पाप पर क्षमा करने के लिए आया। हां, वो हमारे पाप क्षमा करने 29:12 के लिए आया। पर एक मुख्य बात क्यों वो इस पृथ्वी पर आया? वो यह था कि हमें यह दिखा है कि परमेश्वर एक प्रेम करने वाला पिता है। कई बार पूरे सुसमाचारों में यीशु मसीह उसके शिष्यों को यह बात बताते रहा बताते रहा कि क्या ही स्वर्गीय उनका प्रेम करने 29:27 वाला पिता था परमेश्वर यह एक बहुत जरूरी बात है जो हमें जाननी जरूरी है मेरे साथ निकालिए याकूब यहना उसका पहला अध्याय योहना उसका पहला अध्याय 18 वचन किसी ने परमेश्वर को कभी नहीं देखा इस संसार में कई लोग हैं सब लोग हैं जो परमेश्वर की गलत 29:46 सोच रखते हैं क्योंकि वह कल्पना करते हैं कि परमेश्वर कैसा है और मैं आपको भी बताना चाहता हूं कई विश्वासी और शायद आप में से भी कुछ लोग आपकी एक सोच है परमेश्वर के विषय में कल्पना है जो बिल्कुल गलत है गलत हो सकती है सोच कर देखिए कि आप जो परम कि आप 30:02 परमेश्वर के विषय में ऐसा सोचते हो वो जो गलत है और इस वजह से आप निराश हो मेरे पास भी यह समस्या थी कई बार मैं निराशा का गुलाम था स कई सालों तक नया जन्म पाने के बाद भी और मैं आपको बताता हूं क्यों 30:19 क्योंकि मैं हमेशा सोचता था कि परमेश्वर हमेशा मुझ पर देखकर कह रहा है कि मेरे साथ कुछ गलत होगा। हमेशा मैं जी रहा कि मेरे जीवन में कुछ गलत है। मुझे अपना न्याय करते रहना है। अपने आप का न्याय करना अच्छी बात है। पर अगर आप हमेशा 30:35 सोचो कि मेरे में कुछ गलत है, मुझ में कुछ गलत है। कुछ मसीह ऐसा होता है। मैं नहीं जानता उनका वो व्यक्तित्व ऐसा है या जो उनको सिखाया गया है चर्च में। अरे मेरे में कुछ गलत है। मुझ में कुछ गलत है। अपने आप का न्याय मैं अपना न्याय करता हूं। पर 30:49 मैं इस इसके साथ नहीं जीता कि मेरे में कुछ गलत है। प्रभु मुझसे गुस्सा है। परमेश्वर मुझसे गुस्सा है। वो मुझे गलतियां निकालना चाहता है। मैं हर दिन निराश हो जाता था अगर ऐसा होता था तो। सोच कर देखिए आपने क्या सिद्धांत सुना है आपकी 31:01 कलीसिया में। जो संतुलित नहीं है शायद। क्या हमें अपना न्याय करना है? हां। बाइबल पहला पत्रस 17 में लिखा है कि हमें अपने आप का न्याय करना है। पर उसका संतुलन इससे किया जाना चाहिए कि परमेश्वर एक प्रेम करने वाला पिता है। आप क्या सोचते हैं एक 31:17 पृथ्वी के पिता के विषय में? वो अपने बेटे को देखकर कहता है कि बेटा यह गलत है। शाम को कहता है बेटा यह गलत है। हर अगले दिन सुबह कहता है बेटा यह गलत है। क्या होगा उस बेटे के बच्चे के साथ? वो बड़ा होगा निराश रहेगा। एक दुष्ट पृथ्वी का पिता भी ऐसा नहीं है। 31:35 और यीशु मसीह ने कहा तुम पिता जानते हो अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं कैसे देना? अगर वो रोटी मांगे तो आप पत्थर नहीं दोगे। और मैं यह भी कहना चाहता हूं आप इस पृथ्वी के पिता अपने बच्चों को निराश नहीं करते रहते तो आप क्या आपको लगता है आपका 31:48 स्वर्गीय पिता आपका करेगा? आपके बच्चे आपको नहीं बताते कि यह गलत है, यह गलत है। आपके जीवन में कुछ पिता ऐसे होते हैं दुर्भाग्यपूर्ण। आप बहुत बुरे पिता हो। अगर आप आपके बच्चों को यही कह सकते हो यह गलत है वह गलत है वह गलत है आपके जीवन में 32:02 आप आपके बच्चों को निराश कर रहे हो आप निराशा फैला रहे हो आपको ऐसा नहीं होना है हमें लोगों को एक दूसरे को प्रोत्साहित करना है इस संसार में पर्याप्त लोग हैं जो दूसरों को निराश करने वाले हैं। आइए हम उनमें रहे जो संतुलन लाकर लोगों को 32:17 प्रोत्साहित करें क्योंकि परमेश्वर प्रोत्साहन का परमेश्वर है। हम लोगों को चुनौती करना चाहते हैं कि एक उच्च जीवन पर जाएं पर उस ईश्वरीय जीवन की ओर जाने में एक प्रोत्साहन होना चाहिए। परमेश्वर आपकी सहायता करेगा। यीशु मसीह ने अपने शिष्यों को चुनौती दी 32:33 सबसे ऊंचे स्तर के लिए आपको कभी नहीं गुस्सा करना है। ऐसा यीशु ने कहा मैं उसमें विश्वास रखता हूं। मैं विश्वास रखता हूं कि मुझे कभी गुस्सा नहीं होना है। किसी कारण के खिलाफ मुझे गुस्सा तब होना है अगर मैं मसीह के नाम से लोगों को पैसा 32:46 कमाते देखूं। जैसे यीशु मसीह ने उस कोड़े से लोगों को भगाया मंदिर से और मैं गुस्सा हो जाऊंगा जब लोग यीशु मसीह को अपमानित करेंगे कलीसिया में पर कभी मैं गुस्सा नहीं होऊंगा अगर वो मुझे तकलीफ पहुंचाए चोट पहुंचाए लोग यीशु मसीह गुस्सा नहीं हुआ जब लोग उस 33:01 पर थूके या उसको शैतान कहा या ऐसी कोई भी बातें क्या ये ऊंचा स्तर है कि हमें गुस्सा नहीं होना है सिर्फ जब परमेश्वर की महिमा की बात है हमें किसी स्त्री पर कुदृष्टि नहीं करनी है। एक बार भी लालसा से नहीं देखना है। सारे बैरियों से प्रेम रखना है। हर एक 33:17 व्यक्ति जो श्राप देता है उसे हमें आशीषित करना है और अच्छाई भलाई करनी है। जो हमारे प्रति बुरे हैं। क्या ही बड़ा स्तर है ऊंचा स्तर है। पर उसने हमें उस ऊंचे स्तर पर नहीं छोड़ दिया। उसने शिष्यों से यह नहीं कहा कि तुम्हें ऐसा जीना है। ऐसा 33:30 जीना है। तुम्हें दूसरों से प्रेम करना है जैसे मैं तुमसे प्रेम करता हूं। वो निराश हो जाते थे। उसके अंत में उसने कहा मैं अभी तुम्हें पवित्र आत्मा की सामर्थ दूंगा। रुकना परमेश्वर तुमको पवित्र आत्मा से भर देगा और फिर तुम सामर्थ पाओगे। यीशु ने 33:46 कहा कि आप इस सर के अनुसार जी पाओ जो मैंने तुम्हें दिया है। और जब आप वचन को पढ़ते हो सिर्फ उस स्तर को ना देखें जो परमेश्वर ने आपके लिए रखा है। आप एक ईमानदार मसीह हो और आप निराश हो जाते हो क्योंकि आप उस स्तर तक नहीं पहुंचे हो और 34:00 उसी सिक्के का एक दूसरा हिस्सा है। दूसरा सिक्का दूसरा बाजू यह है। एक बाजू यह है परमेश्वर का यह आदर्श है। उस सिक्के का दूसरा बाजू है। मैं तुम्हें सामर्थ दूंगा। परमेश्वर पर खोजिए कि वह आपको सामर्थ दे। पवित्र आत्मा से भर दे। मैं आपको अपनी 34:16 गवाही बताता हूं। जिस बात ने मुझे निराशा से हमेशा के लिए पूरी तरीके से छुटकारा दिया। गुस्से से भी जब परमेश्वर ने मुझे दिखाया कि पवित्र आत्मा से भरने का क्या अर्थ है? और मेरे अंदर एक बहुत बड़ी प्यास लाई। 34:34 जैसे यीशु ने कहा अगर कोई प्यास करे तो यहना 7 37 उसे मेरे पास आने दो और मुझसे पिए और मैं यीशु मसीह के पास आया। यह कई सालों के बाद जब मेरा नया जन्म हो चुका था। 16 वर्षों के लिए मेरे नए जन्म 34:50 के बाद मैं बार-बार निराश होता था। मैं डिप्रेस हो जाता था। मैं हारा हुआ था। गुस्सा होता था। मेरे शादी के बाद भी मैं घर पर गुस्सा करता था। मैंने कहता था कि परमेश्वर यह तेरी इच्छा नहीं है। मैं इतना हारा हुआ था। मैं कह सकता है कि मैं बिल्कुल गड्ढे 35:09 के निचले सतह तक पहुंच गया। और परमेश्वर वहां मुझसे मिला। और उसने मुझे पवित्र आत्मा से भर दिया और उसने मेरे जीवन की दिशा को बदल दिया। 46 वर्षों पहले मैं सिद्ध नहीं हूं तब से पर तब से वह जो ग्राफ है वह ऊपर ऊपर ऊपर जा रहा है। वह 35:29 मैं कह सकता हूं उसके पहले हमेशा नीचे नीचे नीचे नीचे जा रहा था। और क्या हुआ? मैंने देखा कि मैं यह जीवन जी ही नहीं सकता। यहां एक ऊंचा स्तर है। पर मैंने सिक्के के दूसरे बाजू को नहीं देखा कि परमेश्वर मुझे 35:48 आद सामर्थ भी देगा उस आदर्श के अनुसार जीने के लिए। मैं बस आदर्श को देखकर निराश हो जाता था। अगर मैं सिक्के के दूसरे बाजू को देखता उस वायदे को कि तुम सामर्थ पाओगे। जब पवित्र आत्मा आकर तुम्हें भरता है। और वही हुआ उन शिष्यों के साथ, प्रेरितों के 36:07 साथ वह एक बंद कमरे में जी रहे थे। निराश थे, डरे हुए थे और एक दिन उस बंद कमरे में वह पवित्र आत्मा से भर गए और अचानक उन्होंने दरवाजा खोल दिया और वे पूरे संसार में चले गए बिल्कुल चुनौती पाकर पवित्र आत्मा की वजह से और प्रोत्साहन 36:24 पाकर और दूसरों के लिए वह आशीष बन गए। यह परमेश्वर की आप में से हर एक के लिए इच्छा है और मैं आपको बताना चाहता हूं व्यक्तिगत तौर पर यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर का सेवक होने के नाते अगर आपने अपने जीवन को मसीह को कल भी क्यों ना दिया होगा या आज 36:42 दिया है मसीह को परमेश्वर चाहता है कि वह आपको अपने पवित्र आत्मा से भर दे और मैं यह नहीं कह रहा कि हम अन्य भाषा में बात करने के विषय में या कोई विशेष वरदान वो एक दान है। मैं अन्य भाषा में विश्वा विश्वास करता हूं। परमेश्वर कुछ को देता है। वह सबको नहीं 36:58 देता। पर मैं उसकी बात नहीं कर रहा। अब मैं बात कर रहा हूं सामर्थ्य की कि हम उसके गवाह बने बने। गवाही दें यह नहीं मैं कह रहा। वो मुंह से मुंह खोलकर गवाही देना अपने शब्दों से। पर गवाही बनना। 37:16 प्रेरितो एक आठ। तुम मेरे गवाह बनोगे। वो आपके व्यक्तित्व की बात है। आप मेरे लिए गवाह बन जाओगे और आप मेरे लिए तब गवाह नहीं बन सकते। आप मसीह के लिए तब गवाह नहीं बन सकते अगर आप एक निराश चेहरा लेकर घूमते हो या निराश होकर घूमते हो। 37:34 एक बार मैंने सोचा एक बहुत ही दुखी लगने वाला मसीह वो दूसरे को सुसमाचार दे रहा था। वो कहता है कि तुम मसीह को क्यों स्वीकार नहीं करते? वो कहता है नहीं नहीं मुझे मसीह नहीं चाहिए। मेरे मेरे ही समस्या बहुत सारे है। मुझे तुम्हारी तरह 37:45 निराशा नहीं चाहिए। ये कैसे गवाही है? क्या आप सोच सकते हो ऐसा व्यक्ति मसीह की गवाही देता है? हमारे जीवन में कुछ ऐसा चमकने वाला होना चाहिए। कुछ कहता है कि मसीह ने मेरे जीवन को बदल दिया है। मैं अमीर नहीं हूं। धनी नहीं हूं। मैं सिद्ध नहीं हूं। 38:02 पर परमेश्वर ने मुझे यह सुनिश्चित आश्वासन दिया कि मैं उसका बच्चा हूं। इस मेरे भाइयों बहनों यही निराशा से हमारी छुटकारा आती है कि अगर हम जाने कि परमेश्वर कैसा है। 38:19 मैंने हमेशा कहा है अलग-अलग तरीके हैं कि हम मसीह जीवन को कैसे पकड़ सकते हैं। मैं एक उदाहरण करता हूं। यहां एक पेन है। आप इस पेन को दो उंगलियों से पकड़ सकते हो। या आप उस पेन को पूरे मुट्ठी से पकड़ सकते हो। दो उंगली से अगर पकड़ोगे तो कोई छीन 38:38 लेगा पेन को आसानी से। पर अगर आप मुट्ठी से पकड़ लो उसको बंद मुट्ठी में तो बहुत मुश्किल है किसी को उससे छीनना। और मैं सोचता हूं कि मसीह लोग को लोग दो ही उंगलियों से पकड़ने की कोशिश करते हैं। और शैतान उसको खींच लेता है। पर हम कैसे इस 38:53 मसीह जीवन को पकड़ सकते हैं, जकड़ सकते हैं। एक मजबूत पकड़ मसीह जीवन पर। मैं आपको कुछ बातें बताना चाहता हूं। मैंने क्या पाया है? सबसे पहले यह जो हमारा पंजा होता है, वही हमें पेन को पकड़ना है और वह जो पंजा है हमारा वो है परमेश्वर को जानना कि वह 39:12 हमारा पिता है। परमेश्वर को एक पिता के तौर पर जानना यह नहीं कि वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर है। मेरा व्यक्तिगत पिता एक प्रेम करने वाला पिता जिसने मुझसे इतना प्रेम किया कि उसने अपने इकलौते बेटे को भेजा। एक ऐसे समय जब मैं उससे नफरत करता था। जब मैं अपने आप के 39:32 लिए जी रहा था। जब मैं पाप के लिए जी रहा था। उसने मुझसे तब प्रेम किया। तब नहीं जब मैं उसका मित्र था। उसने मुझसे तब प्रेम किया जब मैं उसका शत्रु था। और मेरे पूरे जीवन भर में यद्यपि मैंने अनाज्ञाकारी की। मैंने उसके खिलाफ बल बलवा 39:47 किया। फिर भी उसने मुझसे प्रेम किया। यह मेरा पिता है। सोच कर देखिए एक पृथ्वी का पिता जो कभी आप पर छोड़ हार नहीं मानता। आप कुछ भी क्यों ना कर ले। यह वो परमेश्वर है जिसकी मैं आराधना करता हूं। ये मेरा पिता है जो मुझ पर कभी हार नहीं मानता जो 39:59 कभी आप पर हार नहीं मानेगा मेरे भाई बहन आपको छोड़ेगा नहीं इस इस विषय में आश्वासित रहें अगर आपके पास यह नहीं होगा तो मसीह जीवन पर आपकी पकड़ ही नहीं आएगी परमेश्वर मेरा पिता है यह मुख्य बात है जैसे मैंने कहा यहना एक 17 में यूहन्ना एक 40:14 18 में किसी ने परमेश्वर को कभी नहीं देखा पर इकलौता पुत्र जो पिता की गोद में है उसने उसे प्रकट किया है यूहन्ना एक 18 यीशु मसीह के इस पृथ्वी पर आया जैसा मैंने कहा हमारे पापों के लिए मरने के लिए नहीं पर परमेश्वर को स्पष्ट करने के लिए कि 40:34 पिता कैसा है अगर आप नहीं जानते कि मसीह आपके लिए मरा उस क्रूस पर तो आप कभी आश्वासित नहीं होगे कि पापों की क्षमा है। आप हमेशा अपराध भाव के साथ जिओगे। पर आप जब जान जाते हो कि वो आपके पापों के लिए मरा और उसका लहू आपको पापों को शुद्ध करता है। वो पूरा अपराध 40:51 दोष चले जाता है। वैसे ही आपको जानना है कि यीशु मसीह आया यह प्रकट करने के लिए कि परमेश्वर एक प्रेम करने वाला पिता है। एक प्रेम करने वाला पिता जो आपसे इतना प्रेम करता है। आपके पिता से अधिक नहीं पर इस पृथ्वी के सबसे अच्छे पिता से भी ज्यादा 41:05 प्रेम वो करता है। यह अद्भुत सत्य है। वो यीशु परमेश्वर को पिता को प्रकट करने के लिए आया। स्पष्ट करने के लिए क्या आप अनुमति दोगे यीशु मसीह को पवित्र आत्मा के द्वारा कि वह पिता को एक प्रेम करने वाले पिता के तौर पर अनुमति प्रकट करें। आपको 41:23 बस बाइबल को पढ़ना होगा और मुझे यह भी बताना है अगर आपकी आदत नहीं है बाइबल पढ़ने की तो आपको अपने आप पर दोष लगाना होगा कि आप निराश होते हो हर समय। जरूर सबसे प्रोत्साहन करने वाला अह किताब इस संसार में वो है बाइबल। और यीशु मसीह ने 41:42 कहा आप जो इस पृथ्वी के लोग हो पिता हो जो अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देते हो तो कितना अधिक आपका स्वर्गीय पिता अच्छी वस्तुएं देगा उनसे जो उसको मांगते हैं मेरे लिए है अपने आप के लिए लोगों ने मुझसे प्रश्न किया है 41:59 सबसे आशीषित वचन क्या है आपके लिए धन्य वचन पूरे बाइबल में जो आपने पाया है 31000 से भी ज्यादा वचन है बाइबल में पर मैं आपको बताना चाहता हूं वह वचन जिसने सबसे नंबर वन वचन यहना तीन 16 नहीं जो बहुत जाना माना है। परमेश्वर ने अपने इस 42:17 जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना इकलौता बेटा दे दिया कि जो कोई उसे विश्वास करे वो नाश ना हो वो अनंत जीवन पाए। मैं उसके लिए धन्यवाद देता हूं परमेश्वर को। पर वो बात जिसने मेरे जीवन में विश्राम लाया। हां मैं उसके लिए धन्यवादी हूं कि मसीह का 42:30 लहू सारे पापों से शुद्ध करता है। ऐसे कई अद्भुत वचन है। पर जब मैंने पढ़ा योहना 17 23 योहना 17 23 यह बहुत जाना माना वचन नहीं है। पर यह वह वचन है जिसने मेरे जीवन को बदल दिया। यहना 17 23 वह कहता है 42:51 यीशु मसीह ने प्रार्थना की एक अद्भुत प्रार्थना अद्भुत बात उस वचन के आखिरी भाग में मैं चाहता हूं कि संसार जाने कि तूने मुझे भेजा वो समझ गए हम उसके आगे और जैसा तू मुझसे प्रेम रखता है वैसा ही तू 43:10 मेरे शिष्यों से भी प्रेम रखता है। तो शिष्यों से प्रेम रखता है। यह मैं समझ सकता हूं कि परमेश्वर मुझसे प्रेम रखता है। हां, मैं उसको समझता हूं। पर दूसरा बात दूसरा भाग जितना उस वो यीशु मसीह से प्रेम करता था। मैं आपको बताना चाहता हूं मैंने 45 वर्ष 43:28 से अधिक इसका प्रचार किया है। यह वो सत्य है जिसने मेरे जीवन को बदल दिया। आप इसको मुझसे सुन सकते हो और आप उसको भूल जाओगे। पर जब परमेश्वर आपको एक प्रकाशित प्रकाशन देता है कि मैं तुमसे प्रेम करता हूं। जैसे मैं अपने बेटे यीशु से प्रेम करता 43:44 था। वो आपके जीवन को बदल देगा। उसने मेरे जीवन को बदल दिया। ऐसा नहीं जो मैंने कुछ किया। उसने मुझसे ऐसा प्रेम रखा जैसा उसने यीशु मसीह से प्रेम रखा था। क्यों परमेश्वर ने अपने बेटे से प्रेम 44:05 किया जब वह इस पृथ्वी पर था। क्योंकि उसके बेटे की एक ही इच्छा थी और वह थी पिता को प्रसन्न करना। यीशु मसीह के जीवन का रहस्य वो है यहना छ उसके 38 वचन में यहना छ 38 मैं स्वर्ग से आया। अपनी इच्छा पूरी करने 44:23 के लिए नहीं वरन अपने भेजने वाले की इच्छा पूरी करने के लिए। इस वजह से पिता ने उससे प्रेम किया। उसने बाद में यह भी कहा कि परमेश्वर मुझसे प्रेम करता है क्योंकि मैं उसकी आज्ञाएं मानता हूं और उसने हमसे भी यह कहा 44:40 अगर तुम मुझसे आज्ञा करोगे आज्ञा मानोगे तो मेरा पिता तुमसे प्रेम करेगा और वह हम तुम्हारे पास आएगा यह 14 21 यहना 14 21 जिसके पास मेरी आज्ञाएं हैं और वह उसे मानता है वही मुझसे प्रेम रखता है यह 14 44:58 21 जिसके पास पास मेरी आज्ञाएं हैं क्योंकि वह बाइबल पढ़ता है और उनको मानता है पवित्र आत्मा के सामर्थ्य के द्वारा अपने सामर्थ से नहीं वो है जो मुझसे प्रेम रखता है और जो मुझसे प्रेम रखता है मेरा प्रेम पिता उससे प्रेम रखेगा अच्छा 45:17 परमेश्वर का एक विशेष प्रेम है उनके लिए जिनके अंदर यह इच्छा है और लालसा है तीव्र इच्छा है कि हर आज्ञा माने जो यीशु मसीह ने दी है मैंने बाइबल की पढ़ाई की है। मैसेज संदेश देने के लिए नहीं। मैं आशा करता हूं कि आप बाइबल इस वजह से नहीं पढ़ते कि आप संदेश 45:36 दे पाओ। मैं बाइबल इस वजह से पढ़ता हूं यह खोजने के लिए कि यीशु मसीह ने मुझे क्या आज्ञा दिए मानने के लिए और दूसरा कौन से वायदे हैं जो यीशु ने मुझे किए हैं। इस वजह से मैं बाइबल को पढ़ता हूं। उसने मुझे क्या करने के लिए बुलाया है? वह कौन से 45:50 वायदे हैं जो वो मुझे बाइबल में देता है। कि मैं उन वायदों को रख पाऊं। उन आज्ञाओं को रख पाऊं। और जब मैं यह करता हूं यहां लिखा है परम पिता मुझसे प्रेम करेगा जैसे वह यीशु से करता था यह अद्भुत सत्य है और जिस प्रकार से मुझे सत्य मिला वह 46:08 ऐसा था यीशु मसीह हमारा बड़ा भाई है ऐसा बाइबल बताती है यह दूसरा सत्य है जो आप में से कई लोग नहीं जानते अगर आप नहीं जानते मेरे साथ निकालिए रोमियो की पत्री 8 29 परमेश्वर ने यह चाहता है कि हम यीशु मसीह जैसे बन जाए रोमियो 8 29 46:27 क्योंकि ताकि वह चाहता है कि यीशु मसीह पहलोटा ठहरे। सबसे बड़ा भाई कई भाइयों में स्वर्ग में परमेश्वर कई बच्चे चाहता है बेटे बेटियां और यीशु मसीह उनमें से पहलोटा सबसे बड़ा भाई यीशु मसीह सिर्फ हमारा प्रभु ही नहीं है। पर रोमियो 8 29 46:44 के जैसा लिखा है मेरा सबसे बड़ा भाई और वह मेरी आंखें खोल देता है। यह समझने के लिए मेरे चार बेटे हैं। और मैंने अपने पहलेोटे के लिए जो कुछ किया मैंने बाकी बच्चों के लिए भी किया। मेरे पास कोई पक्षपात नहीं शून्य पक्षपात मैंने 47:03 कोशिश की पूरी तरीके से पक्षपात से मैं स्वतंत्र हो जाऊं जैसे मेरे बच्चों से मैंने बर्ताव किया उसमें कुछ माता-पिता पक्षपाती होते हैं। अपने कुछ बच्चों के विषय में मैं आपको बताना चाहता हूं अगर आप ऐसे हो आप दुष्ट हो। मैं फिर एक बार 47:18 कहूंगा आप एक दुष्ट माता या पिता हो। अगर आप पक्ष पक्षपाती हो अपने किसी भी एक बच्चे के लिए परमेश्वर बिल्कुल पक्षपाती नहीं है। पक्षपाती पक्षपात यह पाप है और मैं यह समझ गया कि मैं कभी पक्षपाती नहीं होऊंगा अपने बच्चों के प्रति। जो मैं एक के लिए करूंगा 47:35 वो मैं दूसरे के लिए भी करूंगा। अगर मैं एक को डांटता हूं तो दूसरों को भी डांटूंगा। वो सब मेरे लिए एक समान है। और परमेश्वर मेरे से लाखों लाखों लाखों गुना बेहतर पिता है। और इसलिए परमेश्वर में तो पक्षपात हो ही नहीं सकता। शून्य और बाइबल 47:50 रोमियो दो में कहती भी है कि परमेश्वर के साथ कोई पक्षपात नहीं है और अगर यीशु मसीह पहलोटा है, बड़ा भाई है और अगर परमेश्वर के साथ कोई पक्षपात नहीं है तो जो कुछ परमेश्वर ने बड़े भाई के लिए किया वो मेरे लिए भी करेगा जो छोटा भाई है। जैसे मैं 48:05 अगर तुम बुरे होते हुए भी अपने बच्चों के साथ पक्षपात नहीं करते तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता कैसा कोई पक्षपात नहीं करेगा अपने बच्चों के साथ और उसमें यीशु सबसे पहलौठा बच्चा है। उसने मेरे जीवन में ऐसा बड़ा सांत्वना लाया यहनान्ना 17 23 वो 48:21 मुझसे वैसा प्रेम रखता है जैसे वो यीशु से प्रेम रखता था। वो मेरे लिए वैसे देखभाल करेगा जैसे उसने यीशु की देखभाल की। क्या आप कल्पना कर सकते हो क्या ही सांत्वना हृदय में आएगा। समझ लो ये परमेश्वर आपको भौतिक तौर पर दिखाई देता है। परमेश्वर 48:35 प्रकट होता है। परमेश्वर शारीरिक तौर पर आपके सामने प्रकट होकर कहता है। मैं तुम्हारी देखभाल करने वाला हूं। बिल्कुल वैसे जैसे मैंने यीशु के लिए देखभाल की जब यीशु संसार में था। हां मैंने यू नो अनुमति दी कई लोग मेरे 48:52 बेटे को अपमान करें और उनको उसको मार दे पर मैं तेरे जीवन में भी परिस्थितियां न दूंगा पर मैं चिंता करूंगा मेरे इच्छा के बाहर कुछ नहीं आएगा। मैं चाहता हूं तू अपने आप को मेरे प्रति समर्पित कर। यीशु मसीह कभी भूखा नहीं गया। उसको जाकर भीख 49:05 नहीं मांगनी पड़ी किसी से पैसे के लिए। उसको एक रुपया किसी से उधार ना लेना पड़ा। और मैं तुम्हारे जीवन को ऐसा बनाऊंगा कि तुम्हें किसी कभी किसी से उधार नहीं लेना पड़ेगा। कभी मनुष्य पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा। कभी किसी मनुष्य से डरना नहीं 49:19 पड़ेगा। तुम मेरे बेटे यीशु जैसे बनोगे। सोच कर देखिए कि परमेश्वर प्रकट होकर आपको यह कहेगा। क्या आप कल्पना कर सकते हो उसके बाद कभी आप निराश होते हो। पर उसने बाइबल में यह कह चुका है। जब मैं बाइबल को पढ़ता हूं। यह ऐसा है कि परमेश्वर मेरे सामने 49:33 खड़ा होकर कुछ कह रहा है कि मैं तुमसे प्रेम रखता हूं जैसे मैंने यीशु से प्रेम रखा। अगर तुम मुझे मेरी आज्ञा मानोगे जैसे मेरे बेटे ने मेरी आज्ञा मानी अगर तुम्हारे अंदर लालसा है मेरी आज्ञा मानने के तुम सिद्ध नहीं हो यीशु जैसे पर उससे 49:44 कोई फर्क नहीं पड़ता अगर तुम्हारे अंदर लालसा है उसके जैसे चलने की और मेरी आज्ञा मानने के परमेश्वर कहता है परमेश्वर कहता है मैं तुम्हारे साथ रहूंगा जैसे मैं यीशु के साथ था मैं आपको ईमानदारी से कहना चाहता हूं मैं बढ़ा चढ़ाकर नहीं कह रहा जब मैं इस सत्य 50:00 को समझ गया और जब परमेश्वर ने मुझे अपने पवित्र आत्मा से भर दिया और मुझे पवित्र आत्मा से वह भरते रहता है उसने मुझे गुस्से से स्वतंत्र स्वतंत्र कर दिया। मैं 365 दिन साल के घर में जी सकता। एक बिना कभी गुस्सा हुए 50:18 और 366 वर्ष एक लीप ईयर में पूरी तरीके से स्वतंत्र और निराशा से स्वतंत्र कर दिया। मैं यह नहीं कहता कि मैं प्रलोभित नहीं होता। मैं प्रलोभित होता हूं पर मैं उसको सामना करता हूं। प्रलोभन हमारे जीवन के अंत तक होता रहेगा। मैं यह नहीं कहता कि 50:37 आप प्रलोभित नहीं होगे। आप प्रलोभित रहोगे निराश होने के लिए। आंखों से लालसा करने के लिए, झूठ कहने के लिए प्रलोभन, फंसाने के लिए, धोखा देने के लिए, पैसे से प्रेम करने के लिए, काफी गलत बातें करने के लिए प्रलोभित, गुस्सा होने के लिए। पर प्रलोभन 50:49 और पाप ही अलग-अलग है। आप उसका सामना कर सकते हो। आप उसको विरोध करके उससे जयवंत हो सकते हो। परमेश्वर आपको पवित्र आत्मा का सामर्थ देगा। यीशु मसीह ने विश्वास पर इतना जोर दिया। उसने कहा जब तुम्हारे पास विश्वास है तुम इस पहाड़ को भी कह सकते हो। तुम्हारे 51:07 सामने जो पहाड़ है अगर तुम्हारे सामने निराशा का पहाड़ खड़ा है आपके सामने जो आपको आगे चलने से मसीह जीवन में रोक रहा है। हां कई मसीहों के लिए ऐसा ही है। एक पहाड़ यीशु मसीह ने कहा तुम उस पहाड़ से बात कर सकते हो कि निकल जाओ यीशु मसीह के 51:21 नाम से मैं निराश नहीं रहूंगा। मैं परमेश्वर की स्तुति करूंगा। और मैं कोई मनोवैज्ञानिक ट्रिक या मनोवैज्ञानिक बात नहीं कर रहा कि कुछ मनोवैज्ञानिक कहते हैं अपनी सोच बदल दो। नहीं मैं ऐसा नहीं कर रहा। मैं कह रहा हूं एक प्रेम करने वाला पिता मैंने कहा यह 51:39 पंजे के विषय यह मुट्ठी के विषय में सबसे पहले परमेश्वर को पिता के तौर पर जानना। दूसरी बात यह हमारा जो अंगूठा होता है यह बात जानना कि यीशु मसीह का लहू आपको सारे पापों से शुद्ध करता है। पहला योहना 51:56 एक सात और नौ सात और नौ वचन अगर हम अपने पापों को मान लें वो धर्मी और न्याय है कि हमारे सारे पापों को शुद्ध करें। उतना ही नहीं रोमियो पांच नौ भी यह भी बताता है। हम धर्मी ठहराए गए यीशु मसीह के लहू के द्वारा। धर्मी ठहराए जाने का अर्थ है मानो 52:14 आपने एक भी पाप नहीं किया अपने पूरे जीवन में मैं बहुत ज्यादा निराश होता था कि प्रभु मैं फिर एक बार गिर गया फिर एक बार पाप में गिर गया पर जब मैंने यह पहचाना यीशु मसीह का लहू मुझे धर्मी ठहराता है और इब्रानियो आठ में लिखा है 12 वचन में मैं 52:32 तुम्हारे पापों को फिर स्मरण ना करूंगा मैंने कहा पिता फिर मैं कभी उसके विषय में चिंता नहीं करूंगा तू मेरे पापों को याद नहीं करता वो चले गया है मैं धर्म धर्मी ठहराया गया हूं मसीह के लहू के द्वारा और इस वजह से मस मसीह का लहू मेरे लिए ये 52:46 करता है वो मुझे शुद्ध करता है मुझे धर्मी ठहराता है उसके बाद अगली उंगली पांच उंगलियां है सबसे हमारा पंजा जो है परमेश्वर को पिता के तौर पर जानना हमारी अंगूठा मतलब धर्मी होना और शुद्ध होना मसीह के लहू से उसके बाद यह उंगली परमेश्वर का वचन मनुष्य केवल रोटी से नहीं 53:04 बल्कि हर उस वचन से जिएगा जो परमेश्वर के मुख से आता है और उसने हमें बाइबल में जी जो दिए है अगर आपके पास बाइबल अपनी ही भाषा में है। मैं आपको बताना चाहता हूं। मैंने कई लोगों को यह कहा है। अगर आपके पास बाइबल अपनी भाषा में है, अपनी मातृभाषा में और आप पढ़ 53:22 सकते हो और आप उसको नहीं पढ़ते। फिर आपकी यही योग्यता है कि आप धोखा खाओ। आपका यही योग्यता है कि आप निराश रहो। रख दिया जाए और आप खाना नहीं खाते और आप कहते हो कि मैं भूखा हूं। 53:42 फिर यह क्या है? भाई खाना आपके सामने रखा है। आप खाते नहीं और आप कहते हो कि मैं भूखा हूं। परमेश्वर ने आपको उसका वचन दिया है। अपनी ही भाषा में उसने आपको पढ़ाई लिखाई करना सिखाया जहां आप पढ़ सकते हो और आप उसको पढ़ते नहीं बार-बार। फिर आप इसी 53:57 लायक हो कि आप धोखा खाओ और आप निराश हो और सारे लोग आपको धोखा देते हैं इस संसार के। आप उसके लायक हो, योग्य हो। आप आलसी हो। बाइबल के वचन को पढ़ना शुरू करो। उसको आदत बना लो हर दिन। 54:15 अपने आप से कहो आज अगर बाइबल नहीं खा पढ़ा तो मैं खाना नहीं खाऊंगा। इसको नियम बना लो अपने जीवन में। मैंने आज बाइबल नहीं पढ़ा। मुझे आज खाना नहीं खाना चाहिए। अगर आप सचमुच विश्वास रखते हो क्या आपका आत्मा आपके शरीर से ज्यादा जरूरी है? मैं 54:31 आपको बताना चाहता हूं कैसे आप पूरी तरीके से निराश हो सकते हो। निराशा से मुक्त हो सकते हो अपने जीवन के हर दिन। मनुष्य केवल रेटों से रोटी से नहीं जिएगा। परंतु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है। 54:47 और हजारों लाखों वचन है इस किताब में। जो मुझे निराशा से छुटकारा के लिए लिखे हैं। और अगर आप उसको पढ़ोगे ही नहीं। यह एक डॉक्टर की तरह है जो कहता है आपकी यह बीमारी है। इस गोली को ले लो हर दिन हर दिन लेना। आप छुट छुटकारा पाओगे। आप वापस 55:03 आते हो डॉक्टर के पास। डॉक्टर मैं अभी भी बीमार हूं छ महीने के बाद। डॉक्टर कहता है क्या आपने दवाई ली जो मैंने दी थी? नहीं डॉक्टर मैं भूल गया। महीने में एक बार में लेता था। डॉक्टर कहेगा इसलिए आप बीमारी गई नहीं। इसलिए आप अभी भी निराश हो। मनुष्य 55:20 रोटी से नहीं बल्कि परमेश्वर के मुख से निकलने वाले वचन। आपके पास बाइबल है आपके सामने आपके घर में। आप उसको पढ़ते नहीं। कोई इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि आप निराश हो। यह दूसरी उंगली परमेश्वर का वचन। 55:43 तीसरी बात तीसरी उंगली पवित्र आत्मा का सामर्थ्य। यह कोई मनोवैज्ञानिक नहीं है। यह सोच का बदलाव नहीं है। यह कल्पना करने की कोशिश नहीं है। नहीं, मैं इस प्रकार जीने वाला हूं। ऐसा नहीं है। आपको यह पहचानना है कि आपके पास सामर्थ नहीं है। 56:03 निराशा पर जय पाने के लिए। आपके पास सामर्थ नहीं है पाप पर जयवंत होने के लिए। आपके पास वो धैर्य नहीं है, साहस नहीं है। एक गवाह बनने के लिए। मैंने यह कहा। मुझे याद है। जब मैं मसीह के लिए गवाही देने की कोशिश करता था गवाह बनने की। मैं प्रभु 56:18 मुझे शर्म आती है रास्ते में खड़े रहकर प्रचार करने की और मुझे एक ट्रैक देने की शर्म आती है कि उसको मसीह के बारे में मैं कैसे बताऊं तू मेरे लिए उस क्रूस पर लटकने के लिए शर्म नहीं आई तुझे पर मुझे शर्म आ रही है मैं नहीं चाहता कि मैं शर्मिंदा 56:32 महसूस करूं पर मेरे पास सामर्थ नहीं है प्रभु मेरे पास वो हियाव नहीं है कि मैं दूसरों के पास जाकर गवाही दूं तेरे विषय में पवित्र आत्मा से भर दे मैंने प्रार्थना की प्रार्थना की परमेश्वर ने मुझे पवित्र आत्मा से भर दिया और मेरे पास 56:44 हियाव आ गया उसके लिए एक गवाह बनने के लिए मसीह के लिए और इन 60 वर्षों में जब मैं प्रचार कर रहा हूं हां मैं 60 वर्षों से प्रचार कर रहा हूं। परमेश्वर ने मुझे सामर्थ दिया है। आज भी जब मैं प्रचार करने आता हूं मैं कहता हूं प्रभु मैं नहीं जानता क्या कहूं। 57:02 मैं नहीं जानता इन सारे लोगों के जरूरतें तू जानता है उनकी जरूरत को। और ऐसा नहीं कि एक पेशेंट एक डॉक्टर के पास आता है। यहां 100 लोग आए हैं और मुझे सबकी सहायता करनी है एक ही समय पर। कौन इस बात के लिए पर्याप्त है? मनुष्य बिल्कुल 57:19 नहीं। मैं बिल्कुल नहीं। पर मैं कहता हूं परमेश्वर तेरे पवित्र आत्मा के द्वारा ऐसी कोई जरूरत नहीं है जिसको मैं अपने जीवन में पूरा ना कर पाऊं या दूसरे लोगों में। अगर तू मुझे बुलाता है लोगों की सेवा करने के लिए फिर तू जरूर मुझे सामर्थ देगा। 57:32 मुंह मुझे रोटी लेने नहीं खरीदेगा ब्रेड खाने को और मुझे पैसा नहीं देगा। मैं पिता था। मैंने ऐसा नहीं किया। मैंने आपको बताया मेरा बेटा भाग कर आया। मैंने कहा बेटे जब मैंने तुझे कहा ब्रेड लाने के लिए। मैं अपेक्षा करता था कि तू मुझसे 57:44 पैसा मांगे। मैं यह अपेक्षा नहीं कर रहा था कि तू खुद जाकर पैसा कमाए। मैं वहां कुछ सीखा जो मैं कभी नहीं भुला हूं। अगर परमेश्वर मुझसे कुछ करने कहता है। वह अपेक्षा नहीं रखता कि मैं खुद उसको उत्पन्न करूं। उस सामर्थ को वो करने के 57:57 लिए चिंता मत करो। परमेश्वर कहता है और वह अपेक्षा करता है कि मैं उस सामर्थ को क्षमता को उत्पन्न करूं। निराशा पर जय पाने के लिए। नहीं वह मुझसे अपेक्षा करता है कि मैं उसके पास जाकर कहूं। पापा मैं उसको पापा कहता हूं। पापा इब्रानी भाषा 58:12 में अब्बा आपकी जो कोई मातृभाषा है अब्बा पापा तूने मुझसे कहा है कि मैं यह बनूं अब मुझे सामर्थ दे तूने मुझे कहा कि सदा आनंदित रहो प्रभु में फिलिपियों 4 चार मुझे अब आनंद सामर्थ दे तूने मुझे कहा है कभी 58:31 चिंता नहीं करना है फिलिपियों चार चार छ अब मुझे सामर्थ दे तुम बाइबल में अगर आप कुछ भी पढ़े जो परमेश्वर आपको आज्ञा देता है अपने क्षत्रियों से प्रेम करो पिता मैं नहीं कर सकता मुझे सामर्थ दे क्या आप जानते हो बाइबल इसलिए दिया गया है 58:47 कि आपको चुनौती दी जाए कि आप परमेश्वर के पास जाओ। यह तीसरी बात एक दो तीन चौथी बात पवित्र आत्मा का सामर्थ उसके खोजी बने और फिर पांचवी बात यह चौथी उंगली चौथी उंगली 59:05 क्रूस का मार्ग यीशु मसीह ने कहा अगर तुम मेरे पीछे आना चाहो तो अपने क्रूस को हर दिन उठाना पड़ेगा। लक 9:27 मेरे पीछे आ जाओ। मैं आपको यह बताना चाहता हूं एक बात निराशा से जय पाने के लिए वो यह कहने के लिए कि मैं अपने लिए मरने वाला हूं हर 59:20 दिन। अपने आप को इंकार करके यह कहना प्रभु तू उस क्रूस के मार्ग हर दिन चला। मैं अपने आप के लिए मरना चाहता हूं। हर दिन मैं अपने हकों के लिए अधिकारों के लिए मरना चाहता हूं। अगर लोग मुझे अपमानित करें। मैं एक मरे हुए व्यक्ति जैसे उनको 59:37 प्रतिक्रिया देना चाहता हूं। जब लोग मेरी सराहना करें, तारीफ करें। मैं वैसे ही प्रतिक्रिया देना चाहता हूं जैसे मैं मरा हूं। कोई प्रतिक्रिया नहीं। जब लोग मेरा अपमान करें। मैं एक मरा हुआ व्यक्ति होना चाहता हूं। कोई प्रतिक्रिया नहीं। जब 59:51 संसार मुझे आकर्षक करता है किसी बात से खींचता है कि मैं उसके प्रति लोभी हूं। मैं एक मरा हुआ व्यक्ति हूं। मैं उसके प्रति आकर्षित होने से मना करता हूं। आकर्षित होने से। अगर आप यह मार्ग नहीं चुनोगे तो आप जरूर निराश होगे। जरूर 1:00:06 क्रूस का मार्ग अपने आप को मरना हर दिन और आखिर आखिरी बात छठी बात मसीह की देह से संगति परमेश्वर ने हमें यह नहीं बुलाया कि हम अकेले जिए वह चाहता है कि हम संगति रखें दूसरों के साथ बाइबल बताती है कि एक दूसरे को 1:00:26 प्रोत्साहित करो। तो इब्रानियों तीसरे अध्याय के 13व वचन में नहीं तो आप पाप के धोखे से आपका हृदय कठोर हो जाएगा। मैं मुझे प्रोत्साहन की जरूरत है और मुझे यह जरूरत है कि मैं दूसरों को प्रोत्साहित करूं। उदाहरण के तौर पर आप में से कई लोग 1:00:45 विवाहित हैं। कौन व्यक्ति है जिसको आप हर दिन देखते हो? आपके पति? आपके पत्नी? मैं आपको एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। आप में से कुछ लोग इतने सालों से विश्वासी हो। कई सालों से आप विश्वासी हो। 1:01:01 मैं आपसे एक प्रश्न करना चाहता हूं। क्या आप अपने पत्नी को प्रोत्साहित करते हो? एक दूसरे को हर दिन प्रोत्साहित करो। किस व्यक्ति को आप हर दिन देखते हो? क्या आप हर दिन अपने पत्नी को प्रोत्साहित करते हो? हम इन बातों को गंभीरता से नहीं 1:01:19 देखते। दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें संगति की जरूरत है। एक दूसरे को प्रोत्साहित करो हर दिन और दूसरे मसीहों के साथ संगति खोजो। आप जहां कहीं रहते हो फोन पर फेलोशिप यह भी अच्छी बात है। अगर हम शारीरिक तौर पर नहीं मिल सकते। अब इस समय जब हम घरों से बाहर नहीं निकल सकते। 1:01:37 मिल नहीं सकते पहले की तरह। जब महामारी नहीं थी तब मिल सकते थे। हम फिर भी संगति कर सकते हैं फोन पर। हां। हमें संगति खोजनी है। यह मत सोचना कि हम मसीह जीवन को अपने आप जी सकते हैं। मैं परमेश्वर को धन्यवाद देता हूं कि मेरे पास 1:01:53 दूसरों के साथ संगति है और हमेशा मैं खोजता हूं संगति को दूसरों के साथ। विशेषकर जो मुझसे अलग है। वो मुझे संतुलित बना देते हैं। मैं बिल्कुल सिद्ध संतुलित व्यक्ति नहीं हूं। मैं अपना संतुलन मसीह के देह में पाता हूं। सेवकाई में भी हमारे कलीसियाओं में 1:02:09 मेरी सेवकाई अकेली वह अच्छी नहीं है। हमारे कलीसियाओं के लिए पर्याप्त नहीं है। मुझे दूसरों के संतुलन की आवश्यकता है। यहां ये छह बातें हैं जो मैंने कहा। परमेश्वर को अपने पिता के तौर पर जानना और यीशु मसीह के लहू से शुद्ध होना। धर्मी 1:02:26 ठहराया जाना मसीह के लहू से। फिर परमेश्वर को सुनना उसके वचन के द्वारा बात करते हुए हर दिन मेरे पास बाइबल भी नहीं होगी जब मैं सुबह उठता हूं मैं बिस्तर में लेटा हूं यह सबसे अच्छी जगह है यीशु मसीह जैसे जंगल में जाया करता था अपने बिस्तर में लेटे रहना 1:02:44 कुछ मिनटों के लिए बिस्तर से उठने के पहले और यह कहना कि प्रभु मैं तुझसे बात करना चाहता हूं मैं तुझसे सुनना चाहता हूं प्रभु इस बिस्तर से निकलने से पहले जब पूरा संसार सो रहा है मेरे इर्द-गिर्द मैं तुझसे सुनना चाहता हूं बिस्तर से 1:03:00 निकलने के पहले। यह आपके जीवन में बहुत बड़ा अंतर लाएगा, बदलाव लाएगा। और उसके बाद चौथी बात मैं पवित्र आत्मा से भरना चाहता हूं। हर दिन प्रतिदिन एक बार नहीं मैं पवित्र आत्मा से हर दिन भरना चाहता हूं। पांचवी बात प्रभु जैसे तू अपने आप के लिए 1:03:20 मरा और तूने अपना क्रूस हर दिन उठाया। मैं भी अपने आप के लिए मरना चाहता हूं। मेरे जीवन के हर दिन और उस क्रूस को उठाना चाहता हूं और तेरे पीछे चलना चाहता हूं। मैं उस क्रूस के मार्ग पर चलना चाहता हूं। और फिर छठी बात मैं लोगों से संगति खोजना 1:03:36 चाहता हूं। मसीह की देह में प्रभु तू मेरी सहायता कर कि मैं संगति को खोजूं दूसरों के साथ मसीह की देह में और अगर आप इन बातों को मानो अनुसरण करो तो मेरा भरोसा है कि परमेश्वर आपको सहायता देगा। जहां आप निराशा पर जयवंत होते हो। 1:03:52 मैं एक वचन आपके लिए पढ़ना चाहता हूं अंत में रोमियो की पत्री आठ उसका पहला अध्याय पहला वचन और इसलिए अतः अब जो मसीह यीशु में उन पर दंड की आज्ञा नहीं यह एक ऐसा वचन है जो बाइबल आपसे कहता परमेश्वर आपसे कहता है 1:04:10 परमेश्वर आपको दंड नहीं देता अपने आप पर दोषी मत दोष मत लगाएं दंड मत देना परमेश्वर में कोई दंड की आज्ञा नहीं है यद्यपि हम गिर जाते हैं हम उठ जाते हैं आप क्या करते हो अगर आप देखिए हम बचपन में चल 1:04:26 नहीं पाते थे जब हम बच्चे थे हम रेंगते थे फिर एक ऐसा समय आया अपने जीवन में शायद आप जब एक वर्ष के थे एक डेढ़ जब आप चल पाए अपने पांव पर हमारे मसीह जीवन में भी बिल्कुल ऐसा है शुरुआत में हम एक ऐसे काल से होकर गुजरते हम नहीं जानते कैसे चलना 1:04:44 है हम गिरते उठते गिरते उठते और फिर एक दिन हम चलना सीख लेते हैं वह एक अद्भुत दिन है कितना एक उत्सुक होता है माता-पिता जब उसके बच्चे चलना सीख जाते हैं। परमेश्वर भी बहुत उत्साही होता है। जब आप चलना सीख गए हो। एक जयवंत जीवन में प्रवेश कर चुके 1:05:02 हो। पर यद्यपि हम चलना भी सीख सीख गए हैं। आज हम में से कोई नहीं कह सकता कि मैं फिसल के नहीं गिरूंगा। नहीं आप फिसल सकते हो। केले के छिलके पर फिसल कर गिर सकते हो। पर गिरने के बाद आप क्या करते हो? आप वही नहीं लेटे रहते निराश होकर। नहीं आप 1:05:17 उठ जाते हो। आप चलना जारी रखते हो। वह हमारा उदाहरण है। ठीक है? आप चलना सीख गए हो। आप जयवंत हो गए हो। पर जय पाने वाले भी कभी ना कभी गिर कर फिसल जाता है। पर वो उठ खड़ा होता है। वो बार-बार नहीं गिर रहा है। जैसे वो बच्चा था तब आप हर दिन नहीं गिरते। चलते 1:05:37 वक्त 20 बार जैसे एक बच्चा गिरता है। नहीं आखिरी बार कब आप कभी गिरे थे चलते-चलते। शायद हम सोच भी नहीं सकते। बहुत कई बार और यही आपके मसीह जीवन में होगा। आपका गिरना कम कम होते जाएगा। पर आप कभी नहीं कह सकते कि मैं कभी नहीं गिरूंगा। मैं आज भी यह 1:05:53 नहीं कह सकता। शारीरिक तौर पर या आत्मिक तौर पर। पर मैं जानता हूं कि वह कम कम कम होते जा रहा है। मैं ज्यादा स्थिर होते जाता हूं अपने पैरों पर आत्मिक तौर पर। और यही आपके साथ भी होगा। परमेश्वर की इच्छा है कि हम बढ़ोतरी करें अपने मसीह जीवन 1:06:07 में। पर हम उसके बावजूद फिसलेंगे। पर कोई दंड की आज्ञा नहीं है। शून्य और मैं आशा करता हूं यह शब्दों से आपने प्रोत्साहन पाया। मैं इस बात को भी कहूंगा कुछ लोग अपने आप को दंड की आज्ञा देते हैं क्योंकि वह एक 1:06:24 सेवकाई खोज रहे हैं। सेवकाई की चिंता ना करें। कुछ लोग एक लोभ रखते हैं। बहुत लालसा रखते हैं सेवकाई की। उनको प्रचारक होना है। उनको आदर प्राप्त करना है। फिर आप निराश होने के लायक हो। योग्यता है आपकी। क्योंकि आप परमेश्वर को प्रसन्न करने को 1:06:42 नहीं खोज रहे। आप आदर खोज रहे हो। मसीह कलीसिया में आप चाहते हो कि आप एक जानेमाने प्रचारक हो या अगोए बनो या ऐसी कोई बकवास बात आपका यह महत्वाकांक्षा हो तो लक्ष्य कि परमेश्वर को प्रसन्न करना है एक जाना माना प्रचारक हो नहीं दूसरों से 1:06:57 आदर प्राप्त करना नहीं अगर हम आदर को प्राप्त करें या पैसे के पीछे भागे तो मैं आपको बताऊंगा आप इस लायक हो योग्य हो निराश होने के लिए जीवन भर आप निराश रहोगे और यह आप इसके बिल्कुल योग्य हो पैसे के पीछे भागना बंद कर दो और लोगों से आदर 1:07:10 खोजना बंद कर दो और यह कहो स्वर्गीय पिता मैं आपको प्रसन्न करना चाहता हूं बस उतना ही मुझे पवित्र आत्मा से तू भर दे। मैं आपको बताना चाहता हूं आपका जीवन बदल जाएगा आज से। परमेश्वर आपको आशीष दे। हम अपने सरों को झुकाएंगे। प्रार्थना करेंगे। 1:07:28 हम अपने सरों को जब झुका रहे हैं। मैं आपसे प्रश्न करना चाहता हूं। एक विषय में सोचिए। 25 बातें नहीं। एक बात जो परमेश्वर ने आपसे आज कही। आप शायद बहुत ज्यादा आत्मिक व्यक्ति भी हो। शायद एक बात है जो परमेश्वर ने आपसे भी कही होगी। एक बात के विषय में सोचे 1:07:45 परमेश्वर ने क्या कही प्रभु मैं उस क्षेत्र में जयवंत होना चाहता हूं। मैं निराश हारा हुआ व्यक्ति नहीं मसीह नहीं होना चाहता। मैं एक बेहतर मसीह होना चाहता हूं। कल आज के तुलना में हां मैं एक बेहतर मसीह होना चाहता हूं। कल जैसे था उसकी 1:07:58 तुलना में। मैं अपने जीवन भर था उससे बेहतर होना चाहता हूं। यह निश्चय करें जीवन परमेश्वर के सामने। प्रभु मैं चाहता हूं कि मेरे जीवन बढ़ाई करे, विकास करें, उन्नति करें। मैं निराशा पर जयवंत होना चाहता हूं। दंड की आज्ञा पर जयवंत होना 1:08:11 चाहता हूं। प्रभु पूरी तरीके से मेरी सहायता कर। मैं विश्वास करता हूं परमेश्वर आपकी सहायता करेगा। स्वर्गीय पिता मैं इन सारे प्रिय भाइयों बहनों के विषय में सोचता हूं। जिन्होंने इतना कष्ट उठाकर आज मुझे सुना है। मैं प्रार्थना करता हूं 1:08:25 कि कुछ जो उन्होंने सुना होगा वह आपसे आया हुआ वचन होगा। उनके हृदय के लिए मेरे प्रिय प्रभु प्रभु यीशु स्वर्गीय पिता यह कई प्रिय भाई बहन बहुत भूखे हैं खोज रहे हैं कई बहुत ईमानदार है उनमें से बहुत तेरे ईमानदार है निराश है उनको तू ऊपर उठा 1:08:44 प्रभु तेरे पवित्र आत्मा से भर दे प्रभु उनको एक भूख और प्यास दे तेरे लिए प्रभु और उनकी सहायता कर कि वह नम्रता में चले अपने बारे में कम सोचे यह विश्वास रखते हुए कि तू उनके लिए बड़े काम करेगा यीशु मसीह के नाम से मांगते हैं आमीन।